कहानी के मुख्य पात्र हैं सनी संस्कारी, जो स्वभाव से सीधा-सादा और भावुक युवक है, और तुलसी कुमारी, जो समझदार, आत्मनिर्भर और व्यावहारिक सोच रखने वाली युवती है। दोनों अपने-अपने जीवन में भावनात्मक उलझनों से गुज़र रहे होते हैं। परिस्थितियों के चलते उनकी मुलाकात होती है और यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।
सनी और तुलसी एक योजना के तहत एक-दूसरे के साथ समय बिताना शुरू करते हैं, जिसका मकसद अपने अतीत से जुड़े अधूरे रिश्तों को लेकर स्थिति को समझना होता है। इस दौरान दोनों के बीच दोस्ती बढ़ती है और कई मज़ेदार व भावनात्मक घटनाएँ सामने आती हैं। दिल्ली के पारिवारिक माहौल, सामाजिक दबाव और शादी से जुड़े पारंपरिक दृश्य कहानी को और रोचक बनाते हैं।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दोनों पात्र अपने विचारों और भावनाओं को लेकर आत्ममंथन करने लगते हैं। कई गलतफहमियाँ और हास्यपूर्ण स्थितियाँ कहानी में रोमांच बनाए रखती हैं। अंत में, परिस्थितियाँ उन्हें यह समझने में मदद करती हैं कि सच्चे रिश्ते अक्सर अनजाने में ही बन जाते हैं।
यह फिल्म दर्शकों को यह संदेश देती है कि रिश्तों में ईमानदारी, समझ और समय का बहुत महत्व होता है। ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक भावनाओं का संतुलित मिश्रण है, जो सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त है।